दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइनों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी कार्गो जहाजों पर 20% सिक्योरिटी चार्ज लगाया जाएगा। इस फैसले ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर हैं, उनके लिए यह फैसला आने वाले दिनों में जेब पर भारी पड़ सकता है।
ईरान ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का कोई अधिकार नहीं है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि इस जलमार्ग का वास्तविक संरक्षक ईरान है, अमेरिका नहीं। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, मिसाइल और ड्रोन हमलों तथा नौसैनिक गतिविधियों के बीच यह विवाद और गहरा गया है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल रही है।
भारत पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है?
भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है। यदि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो शिपिंग, बीमा और फ्रेट कॉस्ट बढ़ सकती है। इसका सीधा असर भारत के आयात बिल, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, रसोई गैस, उर्वरक, केमिकल और कई रोजमर्रा की वस्तुओं पर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो देश में पहले से मौजूद महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। इससे सरकार के वित्तीय प्रबंधन, ईंधन सब्सिडी और आम जनता की जेब—तीनों पर असर पड़ने की आशंका है।
क्या अमेरिका कानूनी तौर पर ऐसा कर सकता है?
संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश को केवल जलसंधि से गुजरने वाले जहाजों पर अनिवार्य टोल या शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। IMO ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली जलसंधियां सभी देशों के जहाजों के लिए खुली रहनी चाहिए और उन पर शुल्क लगाने का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है।
दुनिया के व्यापार पर भी पड़ेगा असर
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो केवल तेल ही नहीं, बल्कि एलएनजी, केमिकल, खाद, मशीनरी और रोजमर्रा के सामान की वैश्विक सप्लाई भी महंगी हो सकती है। शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त लागत ग्राहकों पर डाल सकती हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। इसके साथ ही वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं भी सामने आ गई हैं।
क्या आम लोगों को चिंता करनी चाहिए?
अभी यह प्रस्ताव पूरी तरह लागू नहीं हुआ है और इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी व कूटनीतिक बहस जारी है। लेकिन यदि अमेरिका अपने फैसले पर आगे बढ़ता है और तनाव बढ़ता है, तो आने वाले समय में भारत में पेट्रोल-डीजल, गैस और कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर असर देखने को मिल सकता है।
एक समुद्री रास्ते पर लिया गया फैसला, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की जेब पर असर डाल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि होर्मुज स्ट्रेट का यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है।

