मंदिर बने, सड़कें बनीं, सरकारें बनीं… लेकिन जनता का सबसे बड़ा मुद्दा आखिर गायब कहाँ हो गया?
कभी-कभी इतिहास हमें आईना दिखाता है, लेकिन हम उसमें अपना चेहरा देखने के बजाय केवल दूसरों को खोजते रहते हैं। सोचिए… जिन स्थानों का निर्माण मनुष्य को भीतर से शांत करने, उसे अहंकार से दूर ले जाने और समाज में प्रेम, करुणा तथा नैतिकता का संदेश देने के लिए हुआ था, वे आज राजनीति की…

