देश में E-20 पेट्रोल और एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्ष 2004 से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है, लेकिन अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि एथेनॉल की वजह से किसी वाहन को नुकसान पहुंचा हो। गडकरी ने सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों से बचने की सलाह देते हुए कहा कि देश को तेल आयात पर निर्भरता कम करने, प्रदूषण घटाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैकल्पिक ईंधन की दिशा में आगे बढ़ना ही होगा।
गडकरी ने बताया कि भारत हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का पेट्रोलियम आयात करता है, जबकि एथेनॉल के बढ़ते उपयोग से अब तक लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के आयात में बचत हुई है। उन्होंने कहा कि देश में एथेनॉल केवल गन्ने से ही नहीं, बल्कि मक्का, टूटे चावल, मोलासेस, पराली और बांस से भी तैयार किया जा रहा है। वर्तमान में भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 1750 से 1800 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है, जबकि जरूरत करीब 1450 करोड़ लीटर है। उनके अनुसार इससे किसानों को नई आय का स्रोत मिला है और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली है।
माइलेज को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री ने कहा कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से थोड़ी कम होने के कारण कुछ परिस्थितियों में मामूली अंतर महसूस हो सकता है, लेकिन वाहन का माइलेज मुख्य रूप से सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और ड्राइविंग स्टाइल पर निर्भर करता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में फ्लेक्स-फ्यूल इंजन और नई तकनीकों के जरिए यह अंतर और कम होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरतों और संसाधनों के अनुसार ईंधन नीति बना रहा है और भविष्य में स्वच्छ, सस्ता तथा आत्मनिर्भर ईंधन ही देश की प्राथमिकता रहेगा।

