‘6 साल में एक भी सामूहिक मुकदमा नहीं!’ RTI खुलासे से CCPA पर उठे सवाल, करोड़ों उपभोक्ताओं के अधिकारों पर बहस तेज

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देशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए गठित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक आरटीआई से सामने आई जानकारी के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि गठन के छह साल बाद भी प्राधिकरण ने अपने सामूहिक कार्रवाई (Class Action) के अधिकार का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं की ओर से कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया। इस खुलासे ने उपभोक्ता अधिकारों की प्रभावशीलता पर नई बहस छेड़ दी है।

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 से 2025 के बीच CCPA ने उपभोक्ताओं की ओर से एक भी सामूहिक मामला दायर नहीं किया। जबकि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत प्राधिकरण को स्वतः संज्ञान लेकर ऐसे मामलों में कार्रवाई करने की स्पष्ट शक्ति प्राप्त है।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्लास एक्शन का उद्देश्य उन मामलों में हजारों या लाखों प्रभावित उपभोक्ताओं को एक साथ न्याय दिलाना है, जहां सभी की शिकायत एक जैसी हो। इससे हर उपभोक्ता को अलग-अलग अदालतों या आयोगों में मुकदमा लड़ने की जरूरत नहीं पड़ती और न्याय प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनती है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्चों की मौत से जुड़े कफ सिरप विवाद, बैंकिंग धोखाधड़ी और अन्य बड़े उपभोक्ता मामलों जैसे संवेदनशील मुद्दे सामने आने के बावजूद CCPA ने सामूहिक मुकदमे का रास्ता नहीं अपनाया। इससे प्रभावित लोगों को अलग-अलग कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी, जिससे समय और संसाधनों दोनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।

उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि क्लास एक्शन की व्यवस्था का प्रभावी उपयोग किया जाता, तो समान प्रकृति के कई मामलों का एक साथ निपटारा संभव हो सकता था। इससे न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलती बल्कि उपभोक्ता आयोगों पर बढ़ते मामलों का दबाव भी कम हो सकता था।

हालांकि, RTI रिपोर्ट सामने आने के बाद CCPA की सचिव निधि खरे ने प्राधिकरण का पक्ष भी रखा। उन्होंने कहा कि CCPA अब तक 514 नोटिस जारी, 169 अंतिम आदेश पारित कर चुका है तथा विभिन्न मामलों में 3.43 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।

निधि खरे ने यह भी स्पष्ट किया कि CCPA अपने अधिकारों का उपयोग कानून के अनुसार करता है और जहां आवश्यकता होगी, वहां उपलब्ध सभी वैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा। उनके अनुसार, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

यह मामला अब केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की प्रभावशीलता का भी है जिसे उपभोक्ताओं को त्वरित और सामूहिक न्याय दिलाने के उद्देश्य से बनाया गया था। ऐसे में CCPA की भूमिका और उसके अधिकारों के उपयोग को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में बड़े पैमाने पर प्रभावित उपभोक्ताओं के मामलों में क्लास एक्शन का अधिक इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे न्याय प्रणाली अधिक सरल, तेज और प्रभावी बन सकती है। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा भी संस्थागत व्यवस्था पर मजबूत होगा।

फिलहाल RTI से सामने आए इन तथ्यों और CCPA के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्राधिकरण अपने क्लास एक्शन अधिकारों का उपयोग किस प्रकार करता है और उपभोक्ताओं को सामूहिक न्याय दिलाने की दिशा में क्या नए कदम उठाए जाते हैं।

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