संसद चलो मार्च में बढ़ा तनाव: प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस, लाठीचार्ज; विपक्ष ने सरकार को घेरा

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संसद भवन की ओर बढ़ रहे “संसद चलो मार्च” के दौरान सोमवार को राजधानी में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों को संसद भवन के नजदीक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की भी जानकारी सामने आई।

सुबह से ही जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र होने लगे। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का समूह संसद भवन की ओर बढ़ा, लेकिन रेल भवन चौराहे और अन्य संवेदनशील स्थानों पर पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। सुरक्षा व्यवस्था के चलते पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रखने से रोका जा रहा है। कई छात्र और युवा सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।

स्थिति तनावपूर्ण होने पर सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कई गोले दागे। इसके साथ ही हल्का बल प्रयोग भी किया गया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी पीछे हट गए और सड़क को खाली कराया गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।

इस घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज किया जा रहा है, इंटरनेट सेवाएं प्रभावित की गई हैं और उन्हें संसद तक पहुंचने से रोका जा रहा है।

केजरीवाल ने कहा कि यदि युवा अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं तो उनकी शिकायतों का समाधान करने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।

एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में भी उन्होंने दावा किया कि छात्रों और युवाओं के साथ सख्ती बरती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार करने के बजाय सरकार विरोध कर रहे युवाओं पर कार्रवाई कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संसद भवन देश का अति-संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी कारण प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई और आवश्यकतानुसार सुरक्षा उपाय किए गए।

मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारी सड़क पर धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते रहे। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उनसे बातचीत कर शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का आग्रह किया, लेकिन कुछ समय तक गतिरोध बना रहा। बाद में सुरक्षा बलों ने सड़क खाली कराकर यातायात सामान्य कराया।

फिलहाल प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों के आरोप, विपक्ष की प्रतिक्रियाएं और पुलिस की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मामले में विभिन्न पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और प्रशासन की विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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