बदायूं में पुलिस विभाग से जुड़ा एक मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गाजियाबाद के थाना लोनी में दर्ज हत्या के मुकदमे में वांछित आरोपी की थाना बिनावर पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के मामले में चल रही विभागीय जांच के दौरान दो और पुलिस उपनिरीक्षकों पर गाज गिरी है। जांच में दोषी पाए जाने के बाद दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मामले की शुरुआत उस कार्रवाई से हुई थी, जिसमें थाना बिनावर पुलिस ने गाजियाबाद के लोनी थाने में दर्ज हत्या के मुकदमे में वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी की प्रक्रिया और उससे जुड़े तथ्यों को लेकर पुलिस विभाग ने विभागीय जांच शुरू कराई थी, जिसके बाद मामला वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में पहुंच गया।
इस प्रकरण की प्रारंभिक जांच अपर पुलिस अधीक्षक नगर, बदायूं को सौंपी गई थी। जांच के दौरान लगाए गए आरोप सही पाए जाने पर संबंधित पुलिस उपनिरीक्षक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया था। साथ ही थाना बिनावर के प्रभारी निरीक्षक को भी लाइन हाजिर किया गया था।
इसके बाद मामले की जांच को और विस्तार देते हुए अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, बदायूं को विस्तृत जांच की जिम्मेदारी दी गई। जांच के दौरान प्रकरण से जुड़े पुलिस अधिकारियों की भूमिका की गहनता से पड़ताल की गई और सामने आए तथ्यों के आधार पर दो और उपनिरीक्षकों को दोषी पाया गया।
जांच में थाना फैजगंज बेहटा पर तैनात वरिष्ठ उपनिरीक्षक नरेन्द्र कुमार की भूमिका भी सामने आई। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद वरिष्ठ उपनिरीक्षक नरेन्द्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई आगे भी जारी रहने की बात कही गई है।
इसी जांच के दौरान थाना मूसाझाग में तैनात उपनिरीक्षक राजकुमार सिंह को भी दोषी पाया गया। विभाग ने उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठाते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है।
एक ही मामले में अब तक कई पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई होने से यह प्रकरण गंभीर माना जा रहा है। विभागीय जांच के जरिए पुलिस अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर लगातार पड़ताल की जा रही है, ताकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके।
पुलिस विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों और आरोपों के आधार पर की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रकरण में विभागीय कार्रवाई अभी समाप्त नहीं हुई है और जांच के आधार पर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में यह संदेश भी देने की कोशिश की जा रही है कि किसी मामले में लापरवाही या नियमों के विपरीत भूमिका सामने आने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में चल रही जांच के कारण अब आगे की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है।
फिलहाल नरेन्द्र कुमार और राजकुमार सिंह के निलंबन के बाद इस पूरे मामले में कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। पुलिस विभाग का कहना है कि जांच जारी है और जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और कितने नाम सामने आते हैं।

