उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से विवादों में घिरी इस भर्ती को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मामले पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि इसमें राज्य सरकार ने कोई नया फैसला नहीं लिया है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया गया है।
ओम प्रकाश राजभर ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में जो भी कार्रवाई हुई है, वह अदालत के निर्देशों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से इस मामले को लेकर कोई नया कानून नहीं लाया जा रहा है और न ही यह फैसला राज्य सरकार का अपना निर्णय है।
दरअसल, 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद कथित अनियमितताओं और आरक्षण नियमों के पालन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा है। आरक्षित वर्ग के कई अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में आरक्षण व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पूर्व में संशोधित चयन सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। सरकार ने कहा है कि पहले से कार्यरत 67,867 शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रहेगी और उनकी सेवाओं पर कोई आंच नहीं आएगी।
सरकार की ओर से अदालत के सामने 8,270 नए पात्र अभ्यर्थियों की सूची भी रखे जाने की बात सामने आई है। प्रस्ताव के मुताबिक इन पात्र अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों पर समायोजित करने की दिशा में कार्रवाई की जा सकती है। इसी वजह से भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है।
69 हजार शिक्षक भर्ती का मुद्दा केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पिछले कई वर्षों से यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का भी बड़ा विषय बना हुआ है। अलग-अलग वर्गों के अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं और समय-समय पर आंदोलन भी देखने को मिले हैं।
भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत की बात करें तो उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 दिसंबर 2018 को 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके बाद 6 जनवरी 2019 को परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा के बाद सामान्य वर्ग के लिए 65 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत कटऑफ निर्धारित की गई थी।
इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर कानूनी विवाद शुरू हुआ और मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने कटऑफ को सही ठहराया था। बाद में सरकार ने 67,867 अभ्यर्थियों की पहली चयन सूची जारी की। वहीं, एसटी वर्ग के 1,133 पद योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण खाली रह गए थे।
विवाद का एक अहम पहलू यह भी रहा कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के ऐसे अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए, जिन्होंने सामान्य वर्ग की कटऑफ से अधिक अंक हासिल किए थे, लेकिन उन्हें अनारक्षित श्रेणी में अपेक्षित स्थान नहीं मिलने का आरोप लगाया। इसी मुद्दे को लेकर चयन प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था पर लगातार सवाल उठते रहे।
अब ओम प्रकाश राजभर के बयान के बाद एक बार फिर 69 हजार शिक्षक भर्ती मामला राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। राजभर ने जहां इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन से जुड़ा मामला बताया है, वहीं अभ्यर्थियों की निगाहें अदालत की सुनवाई और आगे आने वाले फैसले पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई से यह साफ होगा कि भर्ती विवाद को लेकर आगे क्या रास्ता निकलता है।

