नई दिल्ली। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन बुधवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार भूख हड़ताल के चलते उनकी सेहत चिंताजनक बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, पिछले 18 दिनों में उनका वजन करीब 8.5 किलो कम हो चुका है। डॉक्टरों की निगरानी के बावजूद वांगचुक अपने आंदोलन पर अडिग हैं। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर देशभर में चिंता बढ़ती जा रही है, जबकि छात्रों और युवाओं के बीच उनके समर्थन में आवाजें तेज हो रही हैं।
यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET जैसी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ था। शुरुआत में इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया, जिसके बाद सोनम वांगचुक भी आंदोलन में शामिल हो गए। वांगचुक का कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य का सवाल है। उन्होंने साफ कहा कि यदि विपक्षी दल इस युवा-नेतृत्व वाले आंदोलन से दूरी बनाए रखते हैं, तो इसे उनकी “संकीर्ण सोच” माना जाएगा और जनता इसका जवाब समय आने पर जरूर देगी।
वांगचुक के अनशन की तुलना वर्ष 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन से भी की जा रही है। हालांकि उस समय कई राजनीतिक दलों और फिल्मी हस्तियों की सक्रिय मौजूदगी देखने को मिली थी, जबकि इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। खासतौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वे हाल के दिनों में NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं। इस बीच वांगचुक ने दोहराया कि उनका संघर्ष किसी सरकार या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था के लिए है। उनका कहना है कि जब तक सरकार सार्थक संवाद और ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

