सहसवान थाना क्षेत्र में बंदर के साथ कथित क्रूरता का वायरल वीडियो अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पशु प्रेमियों ने तत्काल कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन शिकायत के बावजूद सात दिनों तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। आखिरकार पूर्व सांसद और पीपल फॉर एनिमल्स (PFA) की संस्थापक मेनका गांधी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस हरकत में आई और संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई।
जानकारी के अनुसार, पीएफए बदायूं के सदस्य गौरव कुमार ने 14 जुलाई को वायरल वीडियो के आधार पर सहसवान थाने में शिकायत देकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। आरोप है कि शिकायत मिलने के बाद भी थाना पुलिस ने कई दिनों तक न तो कोई ठोस कदम उठाया और न ही शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी दी, जिससे पशु प्रेमियों में नाराजगी बढ़ती गई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पशु कल्याण प्रतिनिधि विकेंद्र शर्मा ने एसएसपी अंकिता शर्मा को रिमाइंडर भेजा और पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि शिकायत की पावती तक नहीं दी गई। उन्होंने एसएसपी कार्यालय को ईमेल भेजने के साथ-साथ पीआरओ से भी कई बार संपर्क किया, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
मामला तूल पकड़ने और मेनका गांधी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने सहसवान के सैफुल्लागंज निवासी गौरव कुमार की तहरीर पर भवानीपुर खल्ली निवासी मुन्ने अली के परिजनों के खिलाफ पशु क्रूरता से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की विवेचना की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब सबसे बड़ा सवाल कार्रवाई में हुई सात दिन की देरी को लेकर उठ रहा है। पशु प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते मुकदमा दर्ज कर लिया जाता, तो पुलिस की कार्यशैली पर सवाल नहीं उठते। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ शिकायत के निस्तारण में हुई लापरवाही की भी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

