विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर मंगलवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूं का प्रांगण महज एक अस्पताल नहीं, बल्कि जन-जागरूकता के एक जीवंत मंच में तब्दील हो गया। ‘वायरल हेपेटाइटिस बी और सी’ जैसी गंभीर लेकिन आसानी से रोकी जा सकने वाली बीमारी के खिलाफ यहां डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने सीधे जनता से संवाद साधा।
प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) शिव कुमार के निर्देशन और वायरल हेपेटाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर की पहल पर आयोजित इस महाअभियान का मूल मंत्र था—’डरें नहीं, समय पर जांच कराएं।’
नुक्कड़ नाटक: जब कला ने दिया जिंदगी का संदेश सुबह ओपीडी परिसर में इलाज के लिए आए मरीजों और उनके तीमारदारों के कदम तब अचानक ठिठक गए, जब एमबीबीएस (बैच 2023 और 2025) के युवा छात्र-छात्राओं ने एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक शुरू किया। नाटक के पात्रों ने बेहद सरल और मार्मिक अंदाज में समझाया कि कैसे एक छोटी सी लापरवाही—जैसे असुरक्षित इंजेक्शन या संक्रमित रक्त—इस जानलेवा बीमारी को न्योता दे सकती है। दूसरी तरफ, एमबीबीएस 2022 बैच के छात्रों ने अपनी तूलिका और रंगों के जरिए कैनवास पर सुरक्षित जीवनशैली के जो पोस्टर उकेरे, वे बिना कुछ बोले ही बहुत गहरा संदेश दे रहे थे।

विज्ञान और विमर्श: जब दिग्गजों ने उधेड़ी बीमारी की परतें दोपहर 2:00 बजे, लेक्चर थिएटर-3 में नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (NVHCP) के तहत एक उच्च स्तरीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का आगाज हुआ।
- प्रो. डॉ. अर्शिया मसूद (सामुदायिक चिकित्सा) ने बीमारी के प्रसार को रोकने के अचूक सामाजिक और व्यावहारिक उपाय साझा किए।
- प्रो. डॉ. ईशा सिंघल (माइक्रोबायोलॉजी) ने वायरस की संरचना, इसके शरीर पर होने वाले हमलों और जांच की माइक्रोस्कोपिक तस्वीर पेश की।
- डॉ. गरिमा चौधरी (सीनियर रेजिडेंट, मेडिसिन) ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में मौजूद इसके सटीक, त्वरित और कारगर इलाज का खाका खींचा।
अब बदायूं में ही मिलेगी मुफ्त और विश्वस्तरीय चिकित्सा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप-प्रधानाचार्य डॉ. नेहा सिंह ने एक अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बदायूं मेडिकल कॉलेज अब शासन द्वारा ‘जनपद स्तरीय नोडल उपचार केंद्र’ घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा, “हेपेटाइटिस एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन यह पूरी तरह से हमारे नियंत्रण में है। संस्थान में इसकी जांच से लेकर इलाज तक सब कुछ पूरी तरह निःशुल्क है, इसलिए किसी को भी झिझकने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने युवा मेडिकल छात्रों की रचनात्मकता और उनकी ऊर्जा की भी जमकर सराहना की।

इस पूरे आयोजन को मूर्त रूप देने वाले मेडिसिन विभाग के प्रभारी डॉ. अमित कुमार और नोडल अधिकारी डॉ. नितेश पति तिवारी ने स्पष्ट किया कि जागरूकता और समय पर जांच ही इस बीमारी के ताबूत में आखिरी कील है। कार्यक्रम की सफल रूपरेखा समन्वयक डॉ. गरिमा चौधरी द्वारा तैयार की गई।
आयोजन में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विपिन कुमार, डॉ. रितुज अग्रवाल, डॉ. मुकत्याज हुसैन, प्रो. डॉ. सीमा सरन, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. वशिष्ठ मिश्रा, डॉ. अमृता बाजपेयी, डॉ. सुचेता यादव, डॉ. श्रवण कुमार, डॉ. लालेन्द्र यादव, डॉ. रश्मि सिंह समेत पूरा मेडिकल स्टाफ और भावी चिकित्सकों की फौज मौजूद रही, जिन्होंने एक स्वर में ‘हेपेटाइटिस मुक्त समाज’ का संकल्प लिया।

