कानपुर में ‘दादी’ गिरोह का खुलासा! रीवा से बच्चों को बुलाकर भीख मंगाने का आरोप, सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

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कानपुर में बच्चों से भीख मंगवाने वाले कथित गिरोह को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। समाज कल्याण विभाग की स्माइल योजना के तहत हुए सर्वे में जिले में करीब 858 भिखारियों की मौजूदगी सामने आई है। सर्वे टीम के मुताबिक, शहर के कई प्रमुख चौराहों पर बुजुर्ग महिलाओं द्वारा बच्चों और बच्चियों से भीख मंगवाने के मामले सामने आए, जबकि कुछ बच्चों के मध्य प्रदेश के रीवा से आने की जानकारी भी सामने आई है।

सर्वे के अनुसार, कानपुर के कई इलाकों में 13 से 16 साल की बच्चियां गोद में छोटे बच्चों को लेकर भीख मांगती दिखाई देती हैं। आरोप है कि चौराहों पर जैसे ही वाहन रुकते हैं, ये बच्चियां लोगों से मदद मांगने के लिए पहुंच जाती हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि रीवा से आने वाली कुछ लड़कियां कानपुर में किराए के कमरों में रहकर भीख मांगती हैं।

शहर के कारगिल पार्क, कंपनी बाग, टाटमिल चौराहा, रेलवे स्टेशन और मरियमपुर जैसे स्थानों पर बच्चों के भीख मांगने की संख्या अधिक बताई गई है। सर्वे में भिखारियों को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है—पहला, जिनके परिवार में पीढ़ियों से भीख मांगने का चलन है; दूसरा, आर्थिक या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण भीख मांगने वाले; और तीसरा, डर, दबाव या किसी के चंगुल में फंसकर भीख मांगने वाले।

मंदिरों में भी भीख मांगने वालों की संख्या दिन के हिसाब से बदलती रहती है। सर्वे के मुताबिक सोमवार को परमट, मंगलवार को पनकी, बुधवार को गणेश मंदिर, गुरुवार को बृहस्पति मंदिर और शनिवार को शनि मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भिखारियों की भीड़ अधिक दिखाई देती है। ऐसे में बच्चों को भीख के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका ने बाल संरक्षण और मानव तस्करी से जुड़े सवालों को गंभीर बना दिया है।

वहीं, अलीगढ़ में एएचटी थाना पुलिस की कार्रवाई भी इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सामने रखती है। पुलिस के अनुसार, इस साल 111 बच्चों को फैक्ट्रियों और ढाबों से मुक्त कराकर शिक्षा की ओर लौटाया गया, जबकि आठ नाबालिग लड़कियों की शादी भी समय रहते रुकवाई गई। ये आंकड़े बताते हैं कि बच्चों को शोषण, बाल मजदूरी, भीख और जबरन गतिविधियों से बचाने के लिए प्रशासन और पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है। अब जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर बच्चों को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और उनके अधिकार दिलाए जाएं।

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