श्री धाम अयोध्या जी से पधारे कलाकारों ने दशरथ का वानप्रस्थ् जाने का विचार, राम् के राज्य अभिषेक कि तैयारी और उत्सव का माहौल ,मन्थरा की कुटिल चाल , कैकयी का कोप् भवन , कैकयी के दो वरदान माँगना, राजा दशरथ का शोक और दुविधा , श्री राम द्वारा सहर्ष वन जाना, सीता व् लक्ष्मण का साथ चलने की ज़िद करना, राम,लक्ष्मन् ,सीता का तपस्वी वेश धारन् कर अयोध्या से विदाई का जीवंत मंचन् कर दर्शकों को भाव विह्वल् कर दिया ।दशरथ विलाप व् वन्वास् की करुण लीला से भक्त व्यथित हो गए । मैं कौन तुम्हारी होती हूँ जो मुझे मनाने आए हो , मन में तो स्वारथ् रखते हो बातों से मनाने आए हो , राधेश्याम रामायन् कि पंक्तियों से कैकयी के कटु कटाक्ष भरे जीवंत अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया । कलाकारों कि मार्मिक प्रस्तुति सभी के आकर्षण का केंद्र रही ।
इस अवसर पर स्थानीय बर्तन व्यव् सायी अनिल,अरविन्द ,मोहित,राहुल व् सूर्य प्रकाश सचिन ,नितिन, मनोज, आदि ने व्यवस्था व् प्रसाद वितरण में योगदान किया । वुजुर्ग् व्यापरि कृष्ण गोपाल बर्तन व्यापारी ने बताया कि लगभग सत्तर् सालों से ये परंपरा अनवरत चलती आ रही है । इस लीला का मुख्य बाज़ार् मे होने से नगर वासियों का इस लीला से अत्यंत जु डाव है । सुर्य प्रकाश ने मध्य बाज़ार मे वनवास् लीला होना नगर का सौभग्य् बताया । रामलीला कमेटी , स्थानीय निवासी व् गन्मान्य जन उपस्थित रहे ।
बदायूं नगर परिसर में चल रहे राम् लीला महोत्सव में शुक्रवार, को राम वन गमन लीला का मन्चन नगर् के पुराना बाज़ार मे किया गया ।

