भारतीय फेंसिंग के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब युवा तलवारबाज तनिक्षा खत्री और प्राची लोहान ने दुनिया की शीर्ष वरीयता प्राप्त चीनी खिलाड़ी यांग जिंगवेन को हराकर ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसकी उम्मीद बहुत कम लोगों ने की थी। दोनों खिलाड़ियों ने अंतिम एलिमिनेशन राउंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ बड़ा उलटफेर किया, बल्कि भारतीय फेंसिंग को विश्व मंच पर नई पहचान भी दिलाई।
इस यादगार जीत के साथ तनिक्षा और प्राची ने सीनियर वर्ल्ड फेंसिंग चैंपियनशिप के मुख्य टेबल ऑफ 64 में अपनी जगह बना ली है। अब दोनों भारतीय खिलाड़ी अगले मुकाबलों में टेबल ऑफ 32 में पहुंचने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी। यदि उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा तो भारत के लिए पदक की उम्मीदें भी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएंगी।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भारतीय तलवारबाजी संघ और एशियाई फेंसिंग महासंघ के महासचिव राजीव मेहता ने दोनों खिलाड़ियों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दो खिलाड़ियों की जीत नहीं, बल्कि भारतीय फेंसिंग के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की मेहनत का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सफलता देशभर के युवा खिलाड़ियों को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
वहीं, प्रतियोगिता के पहले दिन पुरुषों की व्यक्तिगत फॉइल स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। सचिन 107वें, आदित्य 137वें, सानासाम हेमाष सिंह 143वें और तेजस मनोज पाटिल 149वें स्थान पर रहे। हालांकि वे अगले दौर में नहीं पहुंच सके, लेकिन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबला खेलना उनके लिए सीखने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।
भारतीय फेंसिंग के लिए यह उपलब्धि एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। जिस खेल में कभी भारत की मौजूदगी सीमित मानी जाती थी, वहीं अब भारतीय खिलाड़ी विश्व की शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ियों को चुनौती ही नहीं, बल्कि उन्हें हराकर इतिहास रच रहे हैं। अब देश की निगाहें तनिक्षा और प्राची के अगले मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां वे तिरंगे को और ऊंचा ले जाने की कोशिश करेंगी।

