बिल्सी के बाबा इंटरनेशनल स्कूल में नन्हे कलाकारों का कमाल! 🌱✨ कबाड़ से बनाई शानदार कलाकृतियां, दिखी बच्चों की रचनात्मकता

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बाबा इंटरनेशनल स्कूल, बिल्सी में दिनांक 19 अगस्त 2026 (बुधवार) को कक्षा पी.जी. से के.जी. तक के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों के लिए “बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट” प्रतियोगिता का आयोजन उत्साह एवं उमंग के साथ किया गया। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, नवाचार तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता की भावना विकसित करना था।

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बेकार एवं अनुपयोगी समझी जाने वाली विभिन्न वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग करते हुए उन्हें सुंदर, उपयोगी एवं आकर्षक वस्तुओं में परिवर्तित किया। बच्चों ने अपनी कल्पनाशक्ति का प्रयोग करते हुए पुराने डिब्बों, कागज, बोतलों, कार्डबोर्ड, आइसक्रीम स्टिक, कप, अखबार तथा अन्य अनुपयोगी सामग्री से विभिन्न प्रकार की कलात्मक एवं उपयोगी वस्तुएँ तैयार कीं।

नन्हे बच्चों की रंग-बिरंगी एवं आकर्षक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों में अपनी कला को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने का उत्साह एवं आत्मविश्वास देखने को मिला। प्रत्येक बच्चे ने अपनी सोच और सृजनात्मक क्षमता के अनुसार बेकार वस्तुओं को नया रूप देने का प्रयास किया।
प्रतियोगिता में कक्षा पी.जी. से श्रीजा माहेश्वरी ने प्रथम स्थान, आर्यवीर पण्डित ने द्वितीय स्थान, श्रीयान वाष्र्णेय एवं प्रियांश जैन ने तृतीय स्थान, कक्षा एन. सी. से समर्थ यादव ने प्रथम स्थान, कृतिका माहेश्वरी ने द्वितीय स्थान, अक्षत सिंह एवं कुञ्ज वाष्र्णेय ने तृतीय स्थान तथा कक्षा के.जी. से अद्वित मिश्रा, कास्वी जैन ने प्रथम स्थान, सैयांन वाष्र्णेय, लव गुप्ता, कुश गुप्ता ने द्वितीय स्थान, मायशा नूर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया ।

विद्यालय डायरेक्टर अनुज वार्ष्णेय व विद्यालय निदेशिका साधना वार्ष्णेय ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों के उत्साह, मेहनत और रचनात्मकता की प्रशंसा की और कहा कि इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने न केवल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि थोड़ी-सी कल्पनाशक्ति और रचनात्मक सोच से बेकार व अनुपयोगी वस्तुओं को भी उपयोगी बनाया जा सकता है।

विद्यालय की प्रधानाचार्या रूपा माहेश्वरी ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियाँ बच्चों के सृजनात्मक कौशल, आत्मविश्वास, समस्या-समाधान की क्षमता और पर्यावरण संरक्षण की समझ को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि हमें अनुपयोगी वस्तुओं को फेंकने के बजाय उनका पुनः उपयोग करने की आदत विकसित करनी चाहिए, जिससे स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण में योगदान दिया जा सके।
इस अवसर पर विद्यालय प्रशासक अमित माहेश्वरी सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

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