बदायूं जिले के उसहैत क्षेत्र के ग्राम रसूलपुर नगला में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी और सकारात्मक पहल आकार ले रही है। गांव में बन रहा राजकीय हाईस्कूल अब लगभग 80 प्रतिशत तैयार हो चुका है। निर्माण कार्य तेजी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यहां पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इस स्कूल के शुरू होने से वर्षों से हाईस्कूल की मांग कर रहे ग्रामीणों का सपना पूरा होने जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौती स्कूलों की दूरी रही है। रसूलपुर नगला और आसपास के गांवों के छात्र-छात्राओं को दसवीं तक की पढ़ाई के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। लंबी दूरी और संसाधनों की कमी के कारण कई बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते थे। सबसे अधिक प्रभावित गांव की बेटियां होती थीं, जिनकी शिक्षा अक्सर जूनियर स्कूल के बाद रुक जाती थी।
गांव में हाईस्कूल निर्माण की मांग लंबे समय से उठ रही थी। स्थानीय लोगों और ग्राम पंचायत के प्रयासों के बाद सरकारी भूमि पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी मिली। खेल मैदान के निकट चयनित स्थान पर कुछ माह पहले निर्माण कार्य शुरू हुआ और अब यह तेजी से अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
इस पूरे प्रयास में ग्राम प्रधान हुमावी (पति नवीजमा खान) की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी लगातार कोशिशों और प्रशासन से समन्वय के चलते गांव को यह बड़ी सौगात मिली है। लोगों का मानना है कि यह स्कूल आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को नई दिशा देगा।
निर्माणाधीन स्कूल में चार विशाल कक्ष, एक बड़ा हॉल और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके साथ ही स्कूल के बिल्कुल पास पहले से मौजूद ग्राम पंचायत का खेल मैदान विद्यार्थियों को खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों का बेहतर अवसर देगा। इससे बच्चों का शैक्षिक ही नहीं बल्कि सर्वांगीण विकास भी संभव होगा।
इस हाईस्कूल का लाभ केवल रसूलपुर नगला तक सीमित नहीं रहेगा। अनुमान है कि आसपास के लगभग 20 से 25 गांवों के छात्र-छात्राएं यहां शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। इससे बड़ी संख्या में ऐसे बच्चों को फायदा मिलेगा जो दूरी या आर्थिक कारणों से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते थे।
अभिभावकों में भी इस परियोजना को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि अब उन्हें अपने बच्चों को दूर-दराज के कस्बों या शहरों में पढ़ने के लिए नहीं भेजना पड़ेगा। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी, साथ ही बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी परिवार निश्चिंत रहेंगे।
विशेष रूप से गांव की बेटियों के लिए यह स्कूल किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है। पहले हाईस्कूल की सुविधा न होने के कारण कई परिवार बेटियों की पढ़ाई आठवीं के बाद बंद कर देते थे। अब गांव में ही शिक्षा उपलब्ध होने से अधिक से अधिक छात्राएं दसवीं तक और आगे भी पढ़ाई जारी रख सकेंगी।
ग्रामीणों का मानना है कि शिक्षा किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है। यह हाईस्कूल न केवल बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क शिक्षा देगा, बल्कि गांव के सामाजिक और आर्थिक विकास की नींव भी मजबूत करेगा। शिक्षित युवा भविष्य में गांव की तरक्की में अहम भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल निर्माण कार्य तेजी से जारी है और ग्रामीणों की निगाहें इसके जल्द पूरा होने पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही स्कूल का उद्घाटन होगा और बच्चों की कक्षाएं शुरू होंगी। रसूलपुर नगला का यह राजकीय हाईस्कूल आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के लिए शिक्षा का नया केंद्र बन सकता है और हजारों बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम साबित होगा।

